रेकी क्या है ? (What is Reiki)

रेकी वह शक्ति है जो हमारे शरीर, चेतन तथा अवचेतन मन को संतुलित रखने, तथा आध्यात्मक प्रीपेक्ष में उंची उड़ान भरने में हमारी मदद करती है। यह संसार की एक सर्वोत्तम जीवन शक्ति है। यदि हमारे शरीर में ये शक्ति कम हो जाती है तो हम बिमार पड़ जाते हैं और जब इस शक्ति का संचार अधिक हो जाता है तो हम ऊर्जान्वित और स्वस्थ महसूस करते हैं। रेकी जपानी भाषा का शब्द है। ‘रे’ का अर्थ है सर्व-व्यापी और ‘की’ का अर्थ है जीवन ऊर्जा अर्थात सर्वव्यापी जीवन ऊर्जा। हम सभी इस जीवन शक्ति को साथ लेकर पैदा होते हैं और इस जीवन शक्ति के द्वारा ही जीवन जीते हैं। रेकी हमारे चारो ओर पूरे ब्रह्मंड में विद्यमान है। यह पुरातन समय से प्रयोग में लायी जाने वाली चिकित्सा प्रणाली है। जो हाथ से की जाने वाली जपानी आध्यात्मिक उपचार विधि का एक रूप है। यदि उपचार की दूसरी विधियों के साथ इस का उपयोग किया जाये तो अद्भुत लाभ मिलता है। क्योंकि रेकी से दूसरे हानिकारक प्रभाव पैदा नहीं होते इसलिए लाभ बहुत होते हैं। हमारे विचारों पर इसका प्रभाव इस तरह पड़ता है कि व्यक्ति में विश्वास पैदा होता है, व्यवहार में कुश्लता और समझने की भावना पैदा होती है, थके हुए इन्सान के लिए यह एक बड़ा आराम है, मनुष्य के अन्धेरे मन में दिन के प्रकाश जैसा काम करती है। सर्दी में कांपते हुए निर्धन के लिए यह गर्मी का स्रोत है। दुख के समय प्रकृति की ओर से दिया गया सबसे उत्तम सहारा है। यह मनुष्य के स्वास्थ्य की कायाकल्प करने में सहायक होती है। यह एक सरल उपचार प्रणाली है, जिसे कोई भी सीख सकता है, व्यक्ति में बस सीखने की चाह होनी चाहिए। इसे सीखने के लिए ना आयु की कोई सीमा है और ना योग्यता की कोई बंदिश। केवल इच्छा, श्रद्धा एवं विश्वास ही चाहिए। इस उपचार का प्रभाव समय और स्थान की परिधि से अलग है, अर्थात हम यहां से कहीं दूर बैठे बिमार व्यक्ति का उपचार रेकी के माध्यम से कर सकते हैं। यह एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि मनुष्य में किसी व्याधी का बीज उसके आभामण्डल में सबसे पहले उपजता है। हम क्या सोचते हैं दूसरे के प्रति हमारे कैसे विचार हैं इस सब का प्रभाव हमारे आभा-मण्डल पर पड़ता है। आभा मण्डल को विशाल और रंगीन रखने में रेकी हमारी सहायता करती है। इससे व्यक्ति की मनो-वृत्ति एवं मनो-स्थिति को समझने में मदद मिलती है जिससे उसके उपचार को आसान किया जा सकता है। औरा स्कैनिंग (।नतं ैबंददपदह) एक ऐसी विधि है जिसका प्रचार/प्रसार आधुनिक चिकित्साल्यों में किया जाने लगा है। आभा-मण्डल को स्कैन करने से हमें जो नतीजे प्राप्त होते हैं वह आधुनिक एम.आर.आई (डण्त्ण्प्) अथवा सी.टी. स्कैन (ब्ण्ज्ण् ैबंद) से अपेक्षा-कृत कहीं बेहतर हैं। यहीं नहीं इस विद्या का उपयोग प्राणी मात्र के अतिरिक्त, वास्तु शास्त्र में भी किया जाता है। हम किसी घर, खाली स्थान, खेत अथवा किसी रिहायशी ।चचंतजउमदज कारखाने या ऐसे ही किसी व्यवसायिक स्थान का भी ।नतं ैबंद कर सकते हैं तथा यदि आवश्यक हो तो उसका उपचार भी कर सकते हैं। रेकी से जो लाभ हमें प्राप्त होते देखे गये हैं, कुछ इस प्रकार हैंः
  1. हमारी ऊर्जा को संतुलित करती है।
  2. तनाव से मुक्ति दिलाती है।
  3. शारीर में ऊर्जा का अधिक संचार होने लगता है।
  4. पारम्परिक प्रणाली है इसलिए सारे शरीर का शोधन करती है।
  5. बुढ़ापे की रफ्तार को कम करती है।
  6. चेतना को बढ़ाती है।
  7. भावनाओं को सशक्त करती है।
  8. हमारी बतमंजपअपजल को प्रोत्साहित करती है।
  9. समुची रेकी प्रिक्रिया में शारीरिक विकार अपने आप ठीक होने लगते हैं।
  10. रेकी केवल मनुष्यों, पशुओं, पक्षियों, पौधों पर ही नहीं ब्लकि जड़ पदार्थों पर भी अपना प्रभाव छोड़ती है।
  11. शरीर में रूकी एवं बाधित ऊर्जाओं को संचारित करती हैं।
  12. रेकी ब्रह्मिण्डी शकितयों का केवल एक माध्यम मात्र है अतः इससे (उपचारक) को कोई हानि नहीं होती।
  13. रेकी असीम और अनन्त है इसलिए इसकी पूर्ति सदैव बनी रहती है। रेकी जो नहीं हैः- अ यह ना तो कोई धर्म है ना ही इसका किसी जाति वर्ग विशेष से संबंध है। अ बुरी भावनाओं की पूर्ति के लिए इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता। अ इसका भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं से कोई संबंध नहीं है, अतः यह जादू या टोना टोटका भी नहीं है। अ अंध विश्वास और अज्ञानता से इसका कोई लेना-देना नहीं है। अ तंत्र-मंत्र यंत्र इसकी परिधि से बाहर रहते हैं। संसार में आधुनिक तथा पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली में मुख्य अंतर यह रहा है कि जहां पारंपरिक प्रणालीयां मानवीय शरीर को एक इकाई समझ कर सारे पक्षों से सोच-विचार कर चिकित्सा करती हैं तथा रोगी की शारीरिक, मानसिक, भावनात्मिक एवं सभी पहलुओं पर निरपक्ष ध्यान देती है वहीं आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों में यह बात नहीं है। इन प्रणालियों ने मानवीय शरीर को अनेक इकाईयों में बाँट कर रख दिया है। जिसका परिणाम यह हुआ है कि मानव के मानसिक तथा भावनात्मक पहलूओं को अलग रख कर शरीर के भिन्न भिन्न अंगों का इलाज किया जाता है। मानवीय शरीर कोई मशीन नहीं कि इसके अलग अलग भागों का ध्यान रखा जाये। आज इस त्रुटि को बहुत महत्व दिया जाने लगा है संतोषजनक यही होगा कि मानव शरीर को एक इकाई समझा जाये। रेकी एक ऐसी ही थैरेपी है जो मानव को एक इकाई समझ कर काम करती है। रेकी एक आत्मिक व परमात्मिक देन है अतः यह कभी गलत नहीं हो सकती।

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