रेकी उपचार क्या है? कैसे करती है

जब किसी वस्तु में अपने प्राकृतिक गुणों का अभाव हो जाता है और अप्राकृतिक प्रभाव प्रदर्शित करती है, हम उस वस्तु को रोगी कह सकते हैं। यह कोई, सजीव, निर्जीव वस्तु या फिर कोई विचार, कोई घटना, हमारा वातावरण, कोई संबंध या ऐसा ही कोई घटना-क्रम जो अपने अभाव से इधर-उधर हो गया है/गयी हो, हो सकता है। जब निर्जीव वस्तु ठीक प्रकार से काम नहीं कर रही होती तो हम कह सकते हैं कि वस्तु में विकार पैदा हो गया है। ऐसा ही कुछ, किसी घटना से भी हो सकता है। यही वह परिस्थितियां या हालात होते हैं जिन्हें हम रेकी के माध्यम से घटना, हालात, वातावरण या संबंध को रेकी देकर उसी स्थान पर या दूर से उपचार कर सकते हैं। जैसे पहले और दुसरे लैवल में हम हाथ से रेकी देकर उपचार करते हैं। उसी तरह तीसरे लैवल में हम किसी स्थान को स्कैन (ैबंद) करके उस स्थान का उपचार संभव कर सकते हैं। इसी प्रकार तीसरे लैवल में हम रेकी के अन्य यंत्र-उपकरणों का प्रयोग करके रेकी उपचार में तेजी ला सकते हैं। जैसे डाऊजिंग, क्वार्ट्स आदि से इस स्तर पर भावनायें भी अपना असर उपचार पर डालने लगती हैं। अध्यात्म और ध्यान से रेकी उपचार में चार चांद लग जाते हैं। रेकी उपचार में सिंबलों के प्रयोग से और अधिक तेजी लाई जा सकती है। शरीर के रूके हुए अवरूद्धों को खोल कर मनुष्य की प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया (म्दकवबतपदम ैलेजमउ) को सुचारू रूप दिया जा सकता है। सातों चक्र संतुलित किये जाते हैं। इससे शरीर में सकारात्मक प्रक्रिया तो आती ही है, साथ ही व्यक्ति मानसिक स्तर पर अधिक शक्तिशाली हो जाता है। चक्रों के अवरूद्धों को खोलकर संतुलित करने से, शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलाव आता है, ऊर्जा का नव-संचार होता है और व्यक्ति निरोग हो जाता है। तकनीकी कार्यशैली रेकी उपचार के लिए एक एकांत भरा, आरामदायी और शांतिपूर्ण वातावरण तैयार करें। घर में एक ऐसे स्थान का चुनाव करें जो केवल इसी काम के लिए हो। ऐसे रेकी कक्ष का विचार आते ही हम मानसिक स्तर पर उस स्थान सें जुड़ जाते हैं और हमारा शरीर सुखमय अनुभूति से भर जाता है। रेकी करने से पहले अपने अथवा दुसरे के आराम का ध्यान जरूर रखें। सबसे पहले अपनी रेकी करें फिर अपने प्रियजनों की रेकी करें। प्रियजनों के कारण ही इस अनुभूति को प्राप्त कर सकते हैं, प्रियजनों की रेकी करने से आदान प्रदान का चक्र पूरा हो जायेगा। इस के बाद अपने शुभ चिंतकों और स्नेहीयों की सोचें। यदि कोई आपको रेकी के लिए विनती करता है तो उसकी रेकी जरूर करें। बिना किसी के कहे या यूंही अपनी रेकी की जानकारी का ढिंढोरा ना पीटे। अपने आप किसी को ना कहें, ‘‘आओ मैं आपकी रेकी करता हूँ।’’ रेकी ऐसे ही बांटने वाली वस्तु नहीं है। हम जीवित हैं क्योंकि जीवन ऊर्जा का संचार हमारे शरीर और आभा मंडल में लगातार होता रहता है। जीवन ऊर्जा हमारे शारीरिक अंगों और कोशिकाओं को अपनी शक्ति से अभीभूत करती रहती है जिसमें हमारा शरीर अनिवार्य कार्यकर्ता रहता है। जब कभी हमारी शारीरिक जीवन ऊर्जा में किसी प्रकार की रूकावट पैदा हो जाती है तो हमारी कार्यकुशलता अविरूद्ध हो जाती है हमारे अंगों प्रतिअंगों की काम करने की शक्ति कम होने लगती है। हम रोगी जैसा व्यवहार करने लगते हैं अर्थात हम रोगी हो जाते हैं। जीवन ऊर्जा (रेकी) हमारे विचारों और रूचियों पर भी अपना प्रभाव डालती है। हम जाने-अन्जाने नकारात्मक भावनाओं को अपनी और आकर्षित करने लगते हैं इससे ऊर्जा का संचार बाधित होता है। जिससे हमारा शरीर सुस्त और निर्जीव सा हो जाता है। व्याधीयां शरीर को घेर लेती हैं। नकारात्मक ऊर्जा के इस तरह के प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए रेकी हमारी मदद करती है। रेकी इन सभी अंगों और कोशिकाओं में से प्रवाहित होती हुई हमें स्फूर्ति प्रदान करके, ऊर्जा को तरंगित करके, हमारे शरीर के चारो ओर के आभा मंडल को नकारात्मकता से मुक्त करती है। रेकी से मैली ऊर्जा का विखंडन होता है, रास्ते और चैनल साफ होते हैं। नयी ऊर्जा से ओत-प्रोत हो कर, सकारात्मक ऊर्जा प्राकृतिक भाव से अपना स्थान ग्रहण करती है और हम जीवन-दायनी ऊर्जा से स्वस्थ हो जाते हैं। रेकी शक्तिशाली होते हुए भी कोमल है। रेकी ने अपने वर्तमान स्वरूप में हर तरह की बिमारियों को ठीक करने में अपना योगदान पाया है। अनेक प्रकार की कष्ट-दायी बिमारीयों जैसे (डनसजपचसम ैबसमतवेपे), हृदय रोग, अनेकों तरह के कैंसर, चोट में मिले घाव, टूटी हुई हड्डी, असहनीय सिर दर्द, साईनस व गले के रोग, उदासीनता, अनिंदरा, अ-कामुकता, याद-दाश्त, उन्माद, अवसाद स्वःभरोसे में कमी आदि से छुटकारा पाने से रेकी ने अपना करिश्मा दिखाया है। मानसिक कोमल भावों को जितनी अच्छी तरह से रेकी ने समझा है, दूसरी थैरेपीज ने ऐसा काम नहीं किया। दूसरे उपचारों के साथ अगर रेकी का प्रयोग भी किया जाये तो उपचार में तेजी आती है, परिणाम बेहतर और संतोषजनक प्राप्त होते हैं। अध्यात्म का प्रभाव रेकी पर होते हुए भी यह कोई धर्म नहीं है, ना ही इसका धर्म से कोई लेनादेना है। ब्रह्मांडी ऊर्जा होने के कारण रेकी तो अपना काम करती ही है आप चाहे ऐसा माने या ना माने।

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