रचनात्मक मानस दर्शन

अपने अव-चेतन मन की असीमित शक्तियों का प्रयोग करके हम अपना जीवन मन-मुताबिक बना सकते हैं, मनवांछित पदार्थ पा सकते हैं। यह हमारी अपनी शक्ति है जिसके बल पर हम अपने जीवन को सफल तथा सुन्दर बना सकते हैं। मानस दर्शन (अपेनंसप्रंजपवद)ः मन के पर्दे पर साकार रूप् में काल्पनिक वस्तु, दृश्य, विचार आदि को देखना। हमारा भौतिक संसार वास्तव में ऊर्जा है। यह एक विज्ञानिक तथ्य है। इसका मूल घटक या तत्त एक तरह की शक्ति या ऊर्जा ही है। भौतिक रूप में जो हमें दिखता है, वास्तव में अणु तथा सहअणु की संगरचना है। यह एक कण के अन्दर दुसरे सह कणु पर लगातार चलती प्रतिक्रियाएं अन्त में ऊर्जा ही है। विभिन्न ठोस पदार्थ मूल रूप में ऊर्जा तथा एक महान ऊर्जा के अंश हैं। इसके दो रूप हैं सूक्ष्म तथा सघ्न। विचार ऊर्जा का एक सुक्ष्म तथा हल्का रूप हाने के कारण उसको सरलता से बदला जा सकता हैं। पदार्थ ऊर्जा का सघ्न रूप है तथा संगठित भी है तभी इसका बदलाव तथा गतिमानता बहुत ही धीमे होती है। सजीव प्राणी ऊर्जा का बहुत बढ़िया नमूना है, बहुत शीघ्र बदलता है तथा सरलता से प्रभावित हो जाता है। निर्जीव चट्टान बहुत घना रूप है, बदलती तथा प्रवर्तित मुश्किल से होती है। पर यह भी तरल तथा कोमल ऊर्जा में बदल जाती है। ऊर्जा के सारे स्वरूप आपस में संबंधित होने कारण एक दुसरे को प्रभावित करते हैं।

Leave a Reply

X