रंगों की पहचान

1.सफेद क्रिस्टलः यह क्रिस्टल ऊर्जा का संचार करता है। हमारी किसी कमजोरी को सार्थक करने के लिए यह रंग उपयोगी है। इस रंग का क्रिस्टल अपने शरीर, घर, कारखानें, काम के स्थान पर बढ़ौतरी की ऊर्जा अर्जित करने के लिए भी लाभदायक होता है। सफेद रंग का क्रिस्टल सभी मनोरथों के लिए शुभ है।
  1. गुलाबी क्वार्टसः शांति, प्रेम, सहिचार, संबंध, कोमल भाव के लिए उपयुक्त है। अधिक उतेजना, तेज रक्त चाप, शारीरिक ताप, अधिक कामुकता, चिंता, अनिंदरापन, बेचैनी, अधिक तीव्र व्यवहार आदि के लिए सुखमय असर दिखाता है।
  2. ऐमेथिस्ट रंगः शिक्षा, मानसिक समस्याओं, चिंता उतेजना, क्रोध तथा चिड़चिड़ापन, अध्यात्म, आज्ञा (ज्ीपतक म्लम) चक्र की क्रियाशीलता तथा मनो-चेतना आदि को ऊर्जाविंत करने के लिए शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त इन्द्रधनुषी रंग, नारंगी रंग का (ब्पजतपदम) तथा पीले रंग के क्रिस्टल भी प्रयोग में लाये जाते हैं। आकार
  3. एक इंच के आकार का अपना महत्व है। एक इंच से छोटे क्रिस्टल बच्चों के लिए अनुकूल माने गये हैं। 2.एक इंच से बड़े आकार के क्रिस्टल या पैनडंट बड़ों के लिए उचित हैं।
  4. क्रिस्टल-समूह (ब्सनसेजमत) 2ष्ग2ष् ऊँचा 4ष्ग6ष् लम्बा एक 10श्ग12श् कमरे के लिए उचित है।
  5. बड़े आकारी कमरे के लिए 8ष्ग11ष् लम्बा चैड़ा क्रिस्टल प्रयोग में लाया जा सकता है।
  6. फैक्टरियों तथा दुसरे काम वाले स्थानों के लिए भी क्रिस्टल को प्रयोग में लाया जा सकता है।
  7. अपने अस्तित्व के बाद (ैनतअपअंस)काम-शक्ति हर जीवित प्राणी की शारीरिक भूख है। यह हमारी भावनात्मक तथा मनो-ऊर्जा का अभिन्न अंग है। आज के अति कार्यशाली युग में काम-शक्ति की समस्या खुल के सामने आ रही है। आधुनिक वातावरण तथा पुरानी रूढ़ीयों के समाप्न होने के साथ काम (सैक्स) प्रति सोच ने एक नयी अंगढ़ाई ली है जिससे समाज में नयी समस्याओं ने अपना मुंह खोला है। इन समस्याओं के बाहर आने से क्रिस्टल का योगदान बहुमुल्य है। भरपूर जीवन के लिए क्रिस्टल सभी पद्धतियों पर काम करता है। संतोषजनक कामुक जिन्दगी के लिए, मन, शरीर तथा स्वास्थ का ठीक होना अति जरूरी है, क्रिस्टल इस कार्यशीलता को ठीक करके प्रकृतिक रूप् प्रदान करने में सहायी होता है। यहां यह वर्णन करना अनुचित नहीं होगा कि क्वाट्स क्रिस्टल का प्रयोग आदिकाल से मनुष्य किसी ना किसी रूप में करता आया है। इस की जादुयी शक्तियों को अच्छे/बुरे कामों के लिए हमेशा से प्रयोग किया गया है। चीन, जापान में इसकी ऊर्जा को पवित्र माना जाता है। अमेरिका तथा आस्ट्रेलिया की आदम जन-जातियां इसके रहस्यमयी गुणों से अवगत थे। दक्षिण अमेरिका में पेरू नामक ईकंा सभ्यता में प्रोहित लोक क्रिस्टल गेंद (ब्तलेजंस ठंसस) का प्रयोग करते थे। कई जातियां बिमारी के लिए भी इसका प्रयोग करती थीं। क्योंकि यह पृथ्वी के गर्भ से लम्बे समय के बाद बाहर आता है इसकी अपनी चुम्बकी ऊर्जा होती है। हमारे विचारों की भी एक ऊर्जा होती है। जिस विचार या भाव से हम किसी की तरफ देखते हैं या अपने विचार, संचालित करते हैं, उसी तरह का जवाब हमें वापिस मिलता है। अर्थात यदि हम साकारात्मक विचार (ऊर्जा) रेकी से क्रिस्टल में संमाहित कर देते हैं तो क्रिस्टल उसी तरह की साकारात्मक ऊर्जा हमें प्रदान करते हैं। रेकी थैरेपी में इसका प्रयोग प्रत्येक चक्र के रंग के हिसाब से किया जाता है। क्रिस्टल पैनसिलों का प्रयोग क्रिस्टल गद्ये त्ैयार करने में किया जाता है। यह गद्ये जो दो इंच मोटे होते हैं, रेकी द्वारा चार्ज किये क्रिस्टल आवश्यकता अनुसार गद्यों में भरे होते हैं। इन गद्यों का रेकी के क्षेत्र में भिन्न भिन्न बिमारियों के चिकित्सा के लिए प्रयोग होता है। इन गद्यो को और प्रभावशाली बनाने के लिए इनके ऊपर रेकी द्वारा चार्ज किये पिरामिड लगा दिये जाते हैं। जिस समय ये तीनों ऊर्जायें (रेकी, क्रिस्टल एवं पिरामिड) इकट्ठी हो अपना काम करती हैं तो हर छोटी -बड़ी बिमारी को ठीक करने की क्षमता रखती हैं।

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