प्रकाशमय आत्म साधना

  1. भूमि, आसन या सीधी पीठ वाली कुर्सी पर शरीर को ढीला छोड़ कर बैठ जाइये।
  2. कुछ मिन्ट तक साधारण अवस्था में सांस लें।
  3. शरीर के हर हिस्से पर ध्यान दें। धीरे धीरे पैर से शुरू कर शरीर के हर अंग को ढीला छोड़ते हुए सहस्रार चक्र (ब्तवूद ब्ींातं)तक ध्यान करते हुए जायें।
  4. नं3 में दी गयी प्रक्रिया को पे्रम सहित दोहरायें यदि शरीर के किसी भाग में तनाव है तो उस अंग की ओर विशेष ध्यान दें।
  5. अपने आभा मण्डल को महसूस करें इसके लिए प्रेम सहित धन्यवाद करें।
  6. अपने उच्च अस्तित्व (भ्पहीमत ैमस)ि का धन्यवाद करें।
  7. फिर से अपने आभा मण्डल पर ध्यान दें इसको फैला कर अपने घर को इस के आलिंगन में लें, फिर अपने प्रियजनों, अपने क्षेत्र, नगर, देश और विश्व को इसमें समेट लें।
  8. महसूस करें कि आप पे्रम की अनुभूति से परिपूर्ण हैं, सारा विश्व इसके आगोश में है।
  9. हो सके तो इस अनुभूति को रहने दें। फिर अपने आभा मण्डल को वापिस इसके अपने आकार में ले आयें। दिव्य शक्तियों का धन्यवाद करें।
  10. सुक्ष्म ऊर्जाओं को वास्तव में अपने चारों ओर महसूस करें। इनका अस्तित्व स्वीकार करें। इन शक्तियों को जीवन का आधारभूत स्वीकार करें और अपने ज्ञान-बोध से इन शक्तियों से वार्तालाप करें।
  11. अपने पूर्वाभास (प्दजनपजपवद) को सुने और इस पर विश्वास करना सीखें। यह आप के शुद्ध अन्तहकरण की आवाज होती है।
  12. अपने आज्ञा चक्र (ज्ीपतक म्लम) को सश्कत करें। इससे आपका आत्मबल प्रफुल्लित होगा और आप अपने ऊपर भरोसा करना सीखोगे।
  13. अपनी व्यक्तिगत ऊर्जा की तरंगों को पहचानने का अभ्यास करें।
  14. अपने आप को आत्म-ब्रह्मम का अंश माने, आँखें बंद रखें और आत्मा की आवाज को सुने और समझे। 15 अपने त्रिनेत्र पर ध्यान रखें, अपने मन से द्वेष को दूर करें। इस क्रिया में अपनी सुविधा, तजर्बे और बुद्धी के अनुसार बदलाव के लिए उचित स्थान रखें। इस प्रक्रिया का स्तर सुधारना ही हमारे आत्म-बल की बुद्धी की निशानी होगी।
करत करत अभ्यास जड़ मत होत सुजान सर्वव्यापी जीवन शक्ति का विकास जैसे हम सभी जानते हैं कि ‘रेकी’ मानव जीवन की सर्वव्यापी शक्ति है। यह वह शक्ति है जो हमारे आभा मण्डल को सश्क्त करती है। हर वह व्यक्ति जो दिल से ‘रेकी’ करता है, इस का रोजाना अभ्यास करता है, उसको यह सर्वव्यापी जीवन शक्ति संपूर्ण लाभ देती है। हम निरंतर रेकी का अभ्यास करते हैं। कोई दिन के समय या कोई रात के समय इस शक्ति को अपने आभा मण्डल में प्रकाशमान करता है। रेकी दीक्षा के पहले चरण से बाद ही रेकी प्राप्तकर्ता के मन में यह प्रश्न पैदा होने लग जाता है कि हम कैसे अपनी रेकी अभ्यास में सुधार ला सकते हैं। मेरे इस लेख का मुख्य मनोरथ रेकी अभ्यास में सुधार करने के उपाय संबंधी जानकारी देना ही है। रेकी वास्तव में एक अवचेतन मन और ;ैनइ.बवदबपवने डपदक – स्ंू व ि।जजतंबजपवदद्ध का अभ्यास है, जैसे जैसे हम ज्यादा मन्थन में जाते हैं, हमें उतना ही आकर्षण की प्रविृत्ति का अनुभव होता है। इस अभ्यास विधि द्वारा हम अपनी क्षमता को सहज ही परख लेते हैं क्योंकि खुशकिस्मती से हमारी गोद में रेकी जैसा ऐसा अदभुत उपहार प्राप्त हुआ है जिसके द्वारा हम अपने अवास्तविक रूप को वास्तविक रूप में तबदील करते है भाव शैतान से आदमी बनते हैं, आनन्द से मोक्ष प्राप्त करना सीखते हैं तथा असल में जीवन के रहस्य को समझते हैं। रेकी का अभ्यास करते समय कई परेशानीयां, समस्यायें आदि अक्सर नये अभ्यासकर्ता के लिए पैदा होती हैं। यह कोई अस्वभाविक बात नहीं ब्लकि स्वभाविक बात है। बस करना यह है कि समस्या के बीच में से समाधान ढूंढना है तथा उस समाधान को अच्छी तरह लागू करना है। पर एक बात हमेशा यह याद रखने वाली है कि ‘च्तंबजपबम उंामे ं उंद चमतमिबजण्’ मैं कुछ महत्वपूर्ण पक्षों के बारे रोशनी डालने जा रहा हूँ जो रेकी के विकास तथा सुधार में अहम भूमिका निभाते हैं। रेकी को हर बात में मजबूत रखने की जरूरतः अकसर लोगों की यह शिकायत होती है कि रेकी द्वारा जो उपचार वह दुसरे लोगों का कर रहें हैं उस से उन लोगों को लाभ नहीं पहुंच रहा। कई लोगों को ऐसे लगता है कि उनकी रेकी अब इतनी ताकतवर नहीं रही, जितनी पहले होती थी। इस लिए बहुत से लोगों ने अपनी रेकी का अभ्यास बिल्कुल बंद कर दिया है। दोस्तों! हर हाल में मजबूत तथा जागरूक रहना ही रेकी का असल सिधान्त है। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि रेकी का निरन्तर किया उपचार जिन्दगी भर के लिए होता है। भाव यह कि यदि किसी व्यक्ति की बिमारी के पीछे हाथ धो कर पड़ जायें तो बिमारी जड़ से समाप्त होनी स्वभाविक है। पर क्या हम रेकी दिल से करते हैं। यह पहला प्रश्न है। दुसरा प्रश्न है कि हम सच में जीवन की हर परस्थिति से मुकाबला करने के लिए त्यार-बर-त्यार हैं। तीसरा प्रश्न है कि हम निंदा, चुगली, झूठ, फरेब, नशा आदि के प्रति आकर्षित तो नहीं हो जाते। इन उपरोक्त सभी प्रश्नों का परिणाम यही निकलता है कि यदि रेकी का अभ्यास बढ़ाना है या इस आलौकिक शक्ति का तहदिल से विकास ओर सुधार करना है तो सबसे पहले केवल दिखावे की रेकी ना करें ब्लकि यथार्थवादी रेकी करें। मैनें अकसर कैंपों में देखा है कि कई नये रेकी हीलर रोगी की रेकी करते समय आपस में वार्तालाप आदि की आरम्भ कर देते हैं। बेशक नयें रेकी हीलरों को धीरे धीरे इसकी शक्ति की बढ़ौतरी का पता लग जाता है और वह मौन धारण कर अपनी कल्पना शक्ति में अधिक ध्यान देने लग जाते हैं पर कई अपनी अपेनंसप्रंजपवद चवूमत की अहमीयत को नहीं समझते और उसको नजरअन्दाज कर देते हैं जिससे रेकी के अभ्यास में सुधार के स्थान पर गिरावट आनी शुरू हो जाती है। दोस्तों! एक बात यह भी याद रखो कि अपने आप आचार में से सभी विकारों को निकाल, रिश्तेदारों, गली मुहल्लों की जायकेदार बातों को त्याग, भविष्य की चिंता को भूल कर तथा अपने आप को सर्वव्यापी शक्ति के सम्पर्ण करने के बाद ही रेकी में बढ़ौतरी संभव है। हम चाहे रोजाना रेकी करते हैं, रेकी करने के बाद हमारा आभा मण्डल भी विराट तथा पोजिटिव हो जाता है। पर यदि रेकी के बाद सारा दिन हम संसारिक नैगटेविटी में फिर से ग्रस्त हो जाना है तो रेकी शक्ति का असर शर्तिया कम हो जायेगा। जब हम अपने आभामण्डल को रीचार्ज कर लेते हैं तो फिर यह बाद में हमारी प्रमुख जिम्मेदारी है कि इस प्राप्त की हुई शक्ति को कैसे बचाना है। यदि हम रोज अपनी स्टोर की हुई पोजिटीविटी को ऐसे ही बचाते रहे तो वह दिन दूर नहीं होगा जब हमारे हाथ लगाते ही रोगी बिस्टर से उठ कर खड़ा हो जायेगा। इस लिए सबसे पहले भारयुक्त हाने के स्थान पर भारमुक्त होने की अधिक जरूरत है तो ही हम दुसरों को अपनी शक्ति से ठीक कर सकेंगें। दुसरों की मदद करना भी हमारी अपनी रेकी की शक्ति को बढ़ाता है। बुरे का भी भला करना और जरूरत पड़ने पर एक दुसरे के सहायी सिद्ध हाना भी एक माध्यम है। अपनी भीतरी शक्ति को बढ़ाना और दुसरों के काम आना, चाहे वह काम हमारे दो मीठे बोल ही क्यों ना हों, सार्थक सिद्ध होता हो, बहुत लाभदायक होता है। दोस्तोेें! हमें पहले अपने आप को ठीक करना है भाव पहले अपनी रेकी भाररहित हो कर करनी है, अपनी कमजोरीयों को दूर करना और अपने आप को हर बात में ऊँचा और ऊँचा उठाना है। हमें अपने आप को पाक-पवित्रता के उस पड़ाव तक लेकर जाना हैं जहां नैतिकता, श्रद्धाभावना, सत्किार तथा आदर्श हमारे से स्वयं उदाहरण लेने लगें। यदि सचमुच हम ऐसी मंजिल को प्राप्त कर लें तो समझो रेकी अभ्यास में बढ़ौतरी दिन दूनी रात चैगुणी तरक्की से होने लग पड़ी हैै।

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