पिरामिड इच्छापूर्ती उपकरण

स्नान उपरान्त, पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठो। अगरबत्ती दीप जलाओ। सफेद चकौर कागज पर, लाल स्याही से तीनों सिंबल अंकित करो। इस कागज पर अपनी इच्छा, जिसकी पूर्ती करना चाहते हो, उस पर लिखो और स्फटिक को ऊर्जित कर ;म्उचवूमतमक ब्तलेजंसद्ध करके कागज के ऊपर रख दें। इच्छापूर्ती के नियम
  1. पहले अपनी इच्छा का चुनाव करो।
  2. यह इच्छा हमारी शक्ति तथा सामथ्र्य अनुसार होनी चाहिए।
  3. इच्छा मनोविज्ञानिक तथ्य अनुसार होनी चाहिए, व्यवहारिक हो काल्पनिक नहीं। उदाहरण के तौर पर यदि आप सोचो कि मैं ताजमहल खरीदने की इच्छा रखता हूँ या मेरी शादी अमुक सुन्दरी अथवा बमसमइतपजल से हो जाए, ऐसा ना तो व्यवहारिक है और ना ही हो सकता है तथा ना ही आपकी शक्ति के सामथर््य अनुसार।
  4. ऐसी इच्छा के बारे में ना सोचो जिसको आपकी अन्र्तात्मा ही ना मानती हो।
  5. ॅपेी ठवग के द्वारा एक समय पांच या नौं इच्छाओं की पूर्ती संभव है। पिरामिड कोई भगवान नहीं।
  6. जिससे किसी का या अपना अहित होता हो ऐसी नकारात्मक पूर्तीयों को भूल जाओ। ऐसी इच्छाओं की पूर्ती के बारे कभी ना सोचो। रेकी का अहित से कोई संबंध नहीं। ब्रह्मांडीय ऊर्जा सर्वशक्तिशाली है, इसके सन्मुख अपने बुरे भाव कभी प्रगट ना करो। शुभ विचारों को ही फल लगता है।
  7. अपनी इच्छा को बहुत संक्षेप तथा स्पष्ट लिखो। गोलमोल, अटपटी तथा उलझाऊ बातों के बारे में नहीं सोचना चाहिए। विधी ;च्तवबमेेद्धरू.
  8. इस कागज को दो पर्तों (चार तहों) में मोड़ो, सिंबल प्लेट के नीचे रखो तथा पिरामिड इसके ऊपर रखो।
  9. इस को अपने बायें हाथ में रख कर उसके ऊपर दायां हाथ रखो। अपनी इच्छा को कम से कम 21 मिन्ट मन अन्दर दोहराओ। जितनी ज्यादा बार दोहरायेंगें उतना ही बढ़िया परिणाम होगा। इस तरह पिरामिड में ेमस िीमंसपदह शक्ति आ जाती है।
  10. इस उपकरण को घर के अन्दर अध्यात्मिक स्थान पर रखो। यह अभ्यास, प्रतिदिन, जब तक इच्छा पूरी ना हो करते रहो।
  11. इस ेमस िीमंसपदह पिरामिड को अपने सामने रख, सुखासन में बैठ कर रेकी ऊर्जा से शुद्ध करो फिर चार्ज करो। चार्ज हाने के बाद ही पिरामिड अपना काम करेगा।
  12. इच्छा को दोहराने से पहले तथा बाद में ईश्वर का ध्यान जरूर करना चाहिए तथा धन्यवाद भी प्रगट करना चाहिए।
  13. इच्छा पूर्ती उपरान्त कागज को पवित्र अग्नि में जला कर, उसकी राख पौधों में डाल देनी चाहिए। अपनी इच्छाओं की पूर्ती के लिए प्रयोग में लाने जाने वाले अनेक ढंगों में से ‘‘इच्छापूरक डिब्बा’’ अथवा चलतंउपक ूपेी इवग एक अनोखा तथा बढ़िया ढंग है। पिरामिड की अपनी अद्भुत शक्ति होती है जो हमारे लिए रहस्य ही है। यह एक ऐसा यंत्र है जो इच्छाओं को पूरा करने के लिए हमारे अन्दर एक शक्तिशाली स्रोत का काम करता है। हमारे पास यदि पक्का (परिपक्व) निश्चय तथा अटूट विश्वास है तो इच्छाओं की पूर्ती संभव है। इच्छापूर्ण बाक्स में अपनी इच्छा कागज पर अंकित करने के बाद डिब्बे को विशेष दिशा में रखना जरूरी होता है। दिशा का चुनाव इस तरह हो सकता हैः
  14. पूर्व दिशाः प्रेम, शांति, तालमेल, अध्यात्म प्रसन्नता, नाम तथा यश की प्राप्ति के लिए मानी जाती है।
  15. पश्चिम दिशाः अच्छे स्वास्थय, दोस्त, मित्र, अपनों से संबधों को संधारने के लिए शुभ मानी जाती है।
  16. उत्तर दिशाः धन-दौलत, जमीन जायदाद, आभूषण, तरक्की, व्यापार तथा (विलासता) ऐश-ओ-आराम के लिए।
  17. दक्षिण दिशाः दुश्मनों तथा बुरी नजर से बचने के लिए उपयोगी माना जाता है। इस तरह के मामूली निरीक्षण से हम अपनी इच्छापूर्ती के लिये दिशा निर्धारित कर सकते हैं। यदि आप समझते है कि यह बाक्स हमारी सभी इच्छाओं की पूर्ती अपने आप कर देगा तो यह संभव नहीं। सफलता की प्राप्ती के लिए हमारे अन्दर विश्वास जरूरी है। विश्वास ऐसा कि यह इच्छापूर्ण बाक्स मेरी इच्छा को पूर्ण करने में सामथ्र्य है। इस बाक्स में हम जो भी लिख कर रखेगें वह जरूर पूरा होगा। यह कोई अन्धविश्वास नहीं है, इस ढंग से हजारों लाखों व्यक्तियों की इच्छा पूरी हुई है। यह टैलीपैथी की कला की तरह है। जब हम वस्तु विशेष की प्राप्ती के लिए सोचते हैं तो हमारी इच्छाशक्ति द्वारा हमारा संबंध उस वस्तु विशेष से स्थापित हो जाता है। जब हम अपनी इच्छाओं को रोजाना एक विधि से लगातार दोहराते हैं तो हमारा संबंध हमारी इच्छाओं से स्थापित हो जाता है एवं इच्छाएं पूर्ण हो जाती है। हम इस बाक्स की रेकी दूर उपचार विधि से भी कर सकते हैं। मान लीजिये आप किसी काम से घर से दूर हो, आप बाक्स की रेकी नहीं कर सकेगें तो आप यह रेकी दूर उपचार विधि द्वारा कर सकते हो। शांतचित्त होकर विश-बाक्स (ॅपेी ठवग) को अपने ध्यान में लाओ, अपेनंसप्रम यह करना है कि आप अपने घर बैठे हैं तथा उसी प्रकार रेकी कर रहे हैं जिस प्रकार घर बैठ कर करते हैं, उतना ही समय लगाओ इस प्रकार विश-बाक्स (ॅपेी ठवग) की रेकी में विघ्न नहीं पडे़गा। अकसर हम अपनी इच्छाओं की पूर्ती के लिए अपनी शक्ति तथा सकारात्मक विचारों का प्रयोग करते हैं, इस बाक्स के ऊपर पिरामिड लगा होता है, इस लिए पिरामिड की अपनी शक्ति इस कार्य में जुड़ जाती है। पिरामिड की कासमिक ऊर्जा (ब्वेउपब म्दमतहल) इस कार्य को कई गुणा तेज कर देती है। विश-बाक्स को केवल शुरू करना ही कठिन है, फिर अधिक मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती। 20-25 मिनट की रेकी देने के बाद बाकी समय पिरामिड अपने आप काम करता रहता है। सावधानीयांः-
  18. इच्छा पूर्ति उपकरण को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए।
  19. जिस स्थान पर एक बार विश-बाक्स स्थापित कर दिया जाए, उस स्थान से बार बार हिलाया नहीं जाना चाहिए।
  20. पहले ही ऐसे स्थान पर बाक्स को स्थापित करना चाहिए जहां से बदलने की जरूरत ना पड़े। पिरामिड यंत्र पिरामिड अपने आप में एक शक्तिशाली ऊर्जा का स्रोत है। रेकी ऊर्जा से जब पिरामिड की ऊर्जा मिलती है तो यह अपने जादुयी प्रभाव से हमें जागरूक करती है। ब्रह्मांड से आती भूःमण्डलीय ऊर्जा (ब्वेउपब म्दमतहल) को पिरामिडों द्वारा कई गुणा अधिक ऊर्जावान करके रोगीयों के लिए प्रयोग किया जाता है। पिरामिड का शब्दाअर्थ ‘‘ऊर्जा का ऐसा स्रोत जिस के मध्य भाग में अग्नि है।’’ मिश्र के पिरामिड, अपने बड़े आकार, अनोखी संरचना तथा मजबूती के लिए प्रसिद्ध है। पर इससे भी अधिक प्रसिद्धी उनके विज्ञानिक जादुयी प्रभावों की है। अब यह सिद्ध हो गया है कि पिरामिड के अन्दर एक अलग प्रकार की ऊर्जा लगातार चलती रहती है। यह ऊर्जा निर्जीव तथा सजीव दोनों प्रकार की वस्तुओं पर अपना प्रभाव डालती है, विज्ञानिक इसको ‘‘पिरामिड पावर’’ (च्लतंउपक च्वूमत) भी कहते हैं। पिरामिडों के नमूनो से किये गये परिक्षणों से जो परिणाम सामने आए हैं इस प्रकार हैंः-
  21. फल सब्जियों तथा ऐसे पदार्थों को पिरामिड के अन्दर रखने से यह पदार्थ जलहीन (क्मीलकमतंजमक) हो जाते हैं पर ना तो सड़ते हैं ना ही खराब होते हैं।
  22. दूध को पिरामिड के अन्दर रखने से यह खट्टा या खराब नहीं होता। यह दहीं की तरह जम जाता है तथा स्वाद में कोई अन्तर नहीं पड़ता।
  23. फलों के रस, चाय, काफी आदि का स्वाद भी पिरामिड में रखने से खराब नहीं होता।
  24. पानी जैसे तरल-पदार्थ को पिरामिड में रखने से उसके सारे दूषित तत्व समाप्त हो जाते हैं।
  25. पिरामिड अन्दर रखे फूल-पत्तियां, जलहीन तो हो जाते हैं पर ना तो उनके आकार में तथा ना ही उसके रंग एवं खुशबू में कोई अन्तर पड़ता है।
  26. यदि पिरामिडों को अनाज भंडारों के लिए प्रयोग किया जाए तो अनाज कभी भी खराब नहीं होता। कुछ परिक्षण ऐसे भी किये गये जिनसे निम्नलिखित तथ्य सामने आये हैंः-
  27. पिरामिडों में दालों को अंकुरित करने से चिकनाई रहित पर स्वाद भरपूर रहती है तथा उनकों लम्बे समय तक रखा जा सकता है जबकि ऐसे दूसरे पदार्थ रूचिकर नहीं होते।
  28. रसोई में पकायेे व्यंजन, पिरामिड में रखने से अधिक स्वादिष्ट एवं पौष्टिक होते हैं।
  29. वह विद्यार्थी अथवा व्यक्ति जो अधिक मानसिक काम करते हैं, उनकी दिमागी तथा आँखों की थकावट को दूर करने के लिए, पिरामिड में ऊर्जावित पानी से आँखें धोने तथा पानी के छींटे मारने से स्फूर्ति मिलती है।
  30. खुले मुंह वाले प्लास्टिक के लिफाफे/थैलीयों में साक-सब्जी, पिरामड में रखने से ताजा रहती हैं। इसका परीक्षण इस प्रकार कर सकते हैं। ताजा कटी हुई साक-सब्जी का आधा हिस्सा बाहर तथा उसी का आधा हिस्सा पिरामिड में, उपरोक्त ढंग से रखने से, अन्तर अपने आप पता लग जाता है।
  31. ताजे जल को पिरामिड में रख कर ऊर्जावान करो। इस जल से अपना चेहरा प्रतिदिन धोयें, कुछ सप्ताह ऐसा करने से चेहरा कांतिमय हो जायेगा। कुछेक परीक्षण चकित करने वाले थे, जो इस प्रकार हैंः-
  32. एक जर्मन विज्ञानिक ने पहले से प्रयोग किये उस्तरे (त्ं्रवत) को 24 घंटे के लिए पिरामिड में रखा। इसके उपरान्त पाया गया कि ब्लेड शेव बनाने योग्य तीखा हो गया था।
  33. उपयोग किये बैटरी सैलों को भी पिरामिड में रखने से रीचार्ज किया गया।
  34. दवाइयों तथा इंजैक्शन आदि को पिरामिड में अधिक समय के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
  35. त्यार की हुई चाय, काफी आदि को कुछ देर तक पिरामिड में रख कर पीने से यह अधिक स्वादिष्ट लगती है।
  36. पैक किये बरैड, अंडे आदि को अधिक समय तक पिरामिड में सुरक्षित रखा जा सकता है। मनुष्य के शरीर पर, पिरामिड प्रयोग करने से जो असर देखने में आया वह इस प्रकार हैः-
  37. पिरामिड आकार की टोपी 30 मिनट तक पहनने से, सिर दर्द, सिर के बालों का झड़ना, साईनस (बिगड़ा हुआ जुकाम), टैनशन, डिपरैशन, नींद ना आना, बालों का आयु से पहले सफेद होना आदि विकारों में लाभ देखने में आया है। यह काम हम जारी उपचार के साथ साथ भी कर सकते हैं।
  38. जिस स्थान अथवा कुर्सी/आसन पर बैठ कर काम करते हैं, वहां यदि ऊपर पिरामिड लगवा लिया जाये तो अध्ययन में एकाग्रता तथा स्वास्थ में सुधार होता है।
  39. यदि विद्यार्थी अध्ययन समय पिरामिडनुमा टोपी पहन कर काम करते हैं तो उनकी एकाग्रता में सुधार आता है तथा यादशक्ति में भी बढ़ौतरी होगी।
  40. जोड़ों के पीड़ित रोगी, जो किसी तेल आदि को मालिश के लिए उपयोग करते हैं, वह ऐसे तेल अथवा मलहम आदि को पिरामिड में ऊर्जावित करके प्रयोग करें तो लाभ उत्साह-पूर्ण होते हैं।
  41. दंत-मंजन (ज्ववजी च्ंेजम) को पिरामिड में रख कर प्रयोग करने से, दांतों तथा मसूड़ों के रोग मे लाभ मिलता है।
  42. पिरामिड जल से उगाई गयी तुलसी की पतियों को खाने से, सर्दी, जुकाम, हल्का बुखार तथा पेट के रोगों में लाभ मिलता है।
  43. पिरामिड जल से पले हुए फूलदार पौधों के फूलों का रंग तथा सुगंधी साधारण फूलों से अधिक प्रभावशाली होती है। पिरामिड के अन्दर शक्तिशाली ऊर्जा का प्रवाह निर्मित होता है, जिससे वस्तुओं की कार्यशीलता बहुत बढ़ जाती है। इन पिरामिड में ध्यान, गहरा और जल्दी लगता है। ध्यान से हमारे अन्दर आनन्द की अनुभूति पैदा होती है, जिससे मानसिक संतुष्टता का भाव प्राप्त होता है। मन्दिर, गुरूद्वारे, मसीतों, पगोडों तथा गिरिजा घरों आदि धार्मिक भवनों की छतों पर पिरामिड का आकार होने के कारण ही, इन स्थानों पर अधिक ऊर्जा प्रवाहित होने से व्यक्ति को आत्मिक सुख तथा मन की शांति का अनुभव होता है। जिस प्रकार का भाव हम अपने अन्दर प्रकट करते हैं, ठीक वैसे ही भावों की तरगों के साथ ब्रह्माण्ड से जुड़ जाते हैं। वैसे ही भाव की तरंगें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। यह प्रकृति का स्वभाविक आकर्षण विकर्षण का नियम है।

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