पशुओं, पेड़ पौधों और दुसरी वस्तुओं की रेकी

रेकी वह ऊर्जा है जिससे पृथ्वी पर जीवन संभव हुआ है। यह पशुओं, पेड़ पौधों आदि को अधिक तेजी से विकसित होने में सहायता करती है। पालतू जानवर, रेकी के उपचार को बड़े आराम से ग्रहण करते हैं। घरेलु या पालतु कुत्ते, बिल्ली, पक्षी, घोड़े, गधे, गाय, भेड़, बकरी आदि पशुओं का उपचार जब हम हाथ से करते हैं तो उनको सुख का आभास होता है। वह बिना हिले डुले रेकी को प्राप्त करते हैं यदि वह हिलते डुलते भी हैं तो अपने शरीर के उस भाग को रेकी के लिए आगे पीछे या इधर उधर करते हैं। जानवर रेकी के लिए उतनी देर तक सहज भाव से खडे़ या बैठे रहते हैं जितनी देर तक उनको रेकी की जरूरत होती है। आमतौर पर यह समय 20-30 मिन्ट का हो सकता है। कुत्तों को ज्यादा रेकी की जरूरत होती है। बिल्लीयां ऊर्जा के प्रति अधिक संवेदनशील होती है इसलिए थोड़े समय के लिए ही रेकी ग्रहण करती हैं। ज्यादा बिमार पशुओं को अधिक समय के लिए रेकी देनी पड़ती है। जानवर आप ही बता देता हैं कि उसको कितनी रेकी की जरूरत है। जानवर पर्याप्त रेकी लेने के बाद आप ही खड़े हो जाते हैं या कूद कर भाग जाते हैं या एक तरफ हो जाते हैं, हमें समझ लेना चाहिए कि जानवर को और रेकी की आवश्यकता नहीं है। रेकी क्योंकि शरीर-आत्मा और भावना पर पूर्ण रूप से अपना प्रभाव छोड़ती है इस लिए पशु जो ज्यादा बिमार रहें हों और रेकी-उपचार से ठीक हुए हों, उपचारक को हाथ चाटकर अपनी कृत्यज्ञता और स्नेह का भाव प्रगट करते हैं। रेकी उपचारक के प्रति जानवरों का व्यवहार कई बार अनोखा होता है। खास करके कुत्तों का। जो कुत्ते पहले मित्रता से अनभिज्ञ थे रेकी दीक्षा के बाद अधिक स्नेह का बर्ताव दिखाते हैं। बड़े पालतु जानवरों को रेकी से उपचार देना कोई कठिन कार्य नहीं है। किसी घोड़े या गाय की यदि टांग सूजी हो या चोट खाये हुए हो तो रेकी से उस स्थान को ठीक किया जा सकता है। उपचार के समय जानवर शांत भाव से रेकी को प्राप्त करते हैं। यह तथ्य कि रेकी से पशु, पक्षी ठीक होते हैं ये सिद्ध करता है कि उपचार की ये विधि जिसे हम रेकी कहते हैं, कोई ढकोसला नहीं है अपितु एक सच्चाई है। इसी प्रकार पौधों की बिजाई के समय आप बीजों को दो हिस्सों में बांट, एक हिस्से के बीज आप साधारण ढंग से बीज दें और दूसरे हिस्से के बीजों को आप रेकी से उपचार करके बीजें। प्रतिदिन बीजों को रेकी दें। दोनों तरह के बीजों को एक जैसा खाद, पानी डालें। आप देखेंगें कि रेकी प्राप्त बीजों वाला भाग अधिक स्वस्थ होंगा। दूसरी डिग्री प्राप्त रेकी उपचारक सदूर विधि से भी पशुओं और पौधों को रेकी से उपचार भेज सकते

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