चक्रों को संतुलित करना

हमारे चक्रों को संतुलित करने की प्रक्रिया आवश्यक ही नहीं अपितु महत्वपूर्ण भी है। इसके लिए हमें अपने सातों के सातों चक्रों को संतुलित करना होता है। अभ्यासः-
  1. अपनी बांई हथेली को सहस्रार (ब्तवूद) चक्र पर रखें (अंगुलियां जुड़ी हुई हों) दायीं हथेली मूलधारा (त्ववज) चक्र पर रखें। ध्यान ;टपेनंसप्रमद्ध करें कि ऊर्जा का संचार हो रहा है, ये दोनो चक्र संतुलित हो गये हैं। इस प्रीक्रिया को तीन मिन्ट तक करें।
  2. अपना दायां हाथ मूलाधार (त्ववज) चक्र से उठा कर स्वाधिष्ठान (ैंबतंसध्भ्ंतं) चक्र पर ले जायें और इस चक्र पर रखें। बांया हाथ सहस्रार (ब्तवूद) चक्र से उठा कर आज्ञा (ज्ीपतक म्लम)चक्र पर रखें। यह प्रक्रिया तीन मिन्ट तक करें। ध्यान ;टपेनंसप्रमद्ध करें कि आपके आज्ञा चक्र और स्वाधिष्ठान (ज्ीपतक म्लम -ैंबतंस) चक्र में ऊर्जा का संचार हो रहा है, दोनों चक्र संतुलित हो गये हैं।
  3. अब दायां हाथ उठा कर मणीपुर (ैवसंत च्समगने) चक्र पर ले जायें और इस चक्र पर अपनी हथेली रखें। अपना बांयां हाथ विशुद्धी (ज्ीतवंज) चक्र पर रखें। ध्यान करें ;टपेनंसप्रमद्ध कि आप के मणीपुर चक्र और विशुद्धी चक्र (ैवसंत च्समगने ंदक ज्ीतवंज) में ऊर्जा का संचार हो रहा है और दोनों चक्र संतुलित हो गये हैं।
  4. अपने दायें हाथ को अनाहित (भ्मंतज) चक्र पर ले जायें और वहां रखें उपरान्त बायें हाथ को विशुद्धी (ज्ीतवंज) चक्र से उठा कर अपने दायें हाथ के ऊपर रखें। दोनों हथेलियों को एक दूसरे के ऊपर (दायीं नीचे और बायीं ऊपर) रखें। ध्यान करें (टपेनंसप्रम) कि आपके पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार सातों के सातों चक्रों में हो कर आप के अनाहित चक्र (भ्मंतज) पर केन्द्रित हो गया है, आप के सारे चक्र संतुलित हो गये हैं। अब इस संकल्प को बार बार तीन मिन्ट तक दोहरायें। ‘‘मेरे सारे ऊर्जा केन्द्रों का उपचार हो गया है, ये पूर्ण रूप से संतुलित हो गये हैं। ईश्वर की कृपा से मैं पूरी तरह से स्वस्थ, खुश और शांति-पूर्ण हूँ। इस ऊर्जा को लगातार उपचार के लिए स्थापित करता हूँ।

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