इच्छा पूर्ति उपकरण

बनावट:- इच्छा पुर्ति उपकरण तीन तरह का होता है। पहला जिस के द्वारा अपनी एक ही इच्छा की पूर्ति का प्रावधान होता है। दूसरा उपकरण बडा होता है, यह एक साथ पांच इच्छाओं की पूर्ति के लिए बना होता है। तीसरा इन दोनो उपकरणों से बडा होता है अतः 9 इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए बना होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उपकरण कोई जादुई यन्त्र नहीं होते बल्कि हम एकाग्र चित हो कर इन उपकरणों के माध्यम से अपनी इच्छाओं को फलीभूत होता देखने के लिए प्रयत्न करते हैं। इस कार्यशैली को करने के कुछ नियम होते है जो इस प्रकार है:- 1 अपनी इच्छा का चयन सोच समझ कर करें कि वास्तव में इच्छा क्या है। 2 इच्छा सत्य और तथ्य पर आधारित होनी चाहिए। 3 ऐसी इच्छा न रखें जिसे हमारा मन ही मानने को तैयार न हो। 4 एक समय एक ही इच्छा के लिए प्रयोग करें। एक इच्छा को फलीभूत करने के बाद फिर दूसरी व तीसरी आदि के लिए प्रयोग करें। 5 ऐसी इच्छा के बारे में कभी न सोचें जिससे अपना या किसी दूसरे का अहित होता हो। द्वेष, ईष्र्या, क्रोध आदि व्याधियों का रेकी में कोई स्थान नहीं है। ईश्वर सदैव हमारे सकारात्मक भावों की पूर्ति के लिए योग्य हीला वसीला पैदा करता है। सदा सकारात्मक सोचो और इसी के लिए प्रयत्नशील रहो। उपकरण और प्रयोग विधिः- पहला उपकरण 4 इंच का चकोर, प्लासटिक या किसी और सामग्री का पिरामिड होता है। एक सफेद कागज़ पर लाल स्याही से अपनी इच्छा को स्पष्ट और संक्षेप में लिखें। उदाहरण के लिए ‘‘मेरे चश्में का नंबर 3 से 2 हो गया है’’ या ‘‘मैं पूरी लग्न से मेहनत कर रहा हूँ’’अथवा ‘‘मेरा व्यापार दिन दूनी रात चैगुणी तरक्की कर रहा है’’ आदि। इच्छा वर्तमान काल (च्तमेमदज च्मतमिबज ज्मदेम) में लिखी हुई हो। ऐसा ना लिखें ‘‘मेरा घर बन जाना चाहिए अथवा बनने में देरी ना हो ब्लकि लिखें ‘‘मेरा घर मेरी इच्छा और सभी सुविधायों समेत बन गया है।’’ इस उदाहरण का कोई भी साधारण व्यक्ति प्रयोग कर सकता है। इस कागज को दो पर्तों में तह लगा कर इच्छापूर्ती उपकरण के बीच में रख कर ऊपर पिरामिड रख दें। इस उपकरण को घर में किसी पवित्र या किसी स्वच्छ स्थान पर पूर्व दिशा का ध्यान रखते हुए स्थापित कर दें। फिर उपकरण, की एकाग्रचित्त होकर, सुबह शाम अपने इष्ट का ध्यान कर 21 मिनट या अधिक से अधिक जितनी देर हो सके, अपनी इच्छा को दोहरायें। मन में ये भी विचार करते रहें कि आप की इच्छा पूरी हो गयी है। यह क्रम इच्छा के पूरा होने तक, लगातार करते रहें। दूसरे ओर तीसरे उपकरणों में अपनी और दुसरों की इच्छाओं को, बताये गये ढंग से सफेद कागज पर लाल स्याही से लिख कर उपकरणों के बीच में 5 अथवा 9 के क्रम में रखें। हर इच्छा के ऊपर चार्ज की हुई क्रिस्टल पैन्सिल को भी रखें। क्रिस्टल को चार्ज करने की विधि पन्ना नं –देखें। चैरस उपकरण के मध्य में अपनी और बाकि चारों ओर दूसरी या दूसरों की इच्छाओं को रखें। उपकरण को बंद कर ऊपर पिरामिड रख कर, स्वच्छ स्थान पर पूर्व दिशा का ध्यान रखते हुए स्थापित करें। ऊपर बतायी प्रक्रिया के अनुसार अगली कारवाई करें। केवल इस बात का ध्यान रखें कि इस बार इच्छाओं की संख्या अधिक है इस लिए उपकरणों में लिखी इच्छाओं की एक नक्ल, अलग से अपने पास रखें ताकि ध्यान के समय इच्छाओं को दोहराते हुए किसी तरह की भूल ना हो। पिरामिड उपकरण को अपने सामने रखें। सुखासन में बैठ कर पहले शुद्ध करें और फिर चार्ज करना ना भूलें। इच्छापूर्ती उपकरण भले ही भगवान नहीं है फिर भी यदि आप दृढ़ संकल्प से सारी कारवाई करते हैं तो इच्छाओं को पूरा होते देखा गया है। इच्छाओं की पूर्ति के बाद कागजों को निकाल कर, जला दें राख पौधों में डाल दें। महान आत्माओं के गुणों को अपने में ग्रहण करनाः रेकी प्रक्रिया में चमत्कारी शक्ति यह भी है कि इसमें दूसरों के सद-गुणों को अपनी ओर आकर्षित करने का गुण है। व्यक्ति या महानुभाव चाहे मृत हो या जीवित, उसके विशेष गुणों का आवाह्मन कर अपने अन्दर सम्माहित कर सकते हैं।
  1. उस आत्मा या व्यक्ति के गुणों की कल्पना करें।
  2. दूर उपचार सिंबल द्वारा उस विशेष आत्मा या व्यक्ति से सम्बन्ध स्थापित करें और उनके गुणों का अपने अन्दर आवाह्मन करें (प्दअवाम)।
  3. अपने दिमाग में उस आत्मा अथवा व्यक्ति के गुणों का संचार होते स्पष्ट अनुभव करें।
  4. कुछ ही दिनों में आप उन सद-गुणों की सुगन्धी अपने अन्दर महसूस करने लगेगें।

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