आभा मण्डल (Aura)

आभा मण्डल को प्रभा मण्डल के नाम से भी जाना जाता है। सृष्टी की सभी संरचना का अपना अपना आभा मण्डल होता है। यह आभा मण्डल कुछ मिली-मीटर से लेकर कई मीटर ही नहीं अपितु कई किलोमीटर तक हो सकता है। देवी-देवताओं, अवतारों तथा महा पुरूषों की तस्वीरों में उनके शीश के चारों ओर हम जो प्रकाश-चक्र देखते हैं, आभा मण्डल का सबसे बढ़िया उदाहरण है। हर व्यक्ति का आभा-मण्डल उसकी माँ के गर्भ में पनपने से लेकर उसकी मृत्यु तक उसके साथ रहता है। यह एक ऐसा ईश्वरी उपहार है जिस से मनुष्य के सम्पूर्ण व्यक्तित्व व्यवहार/रूचियों, शारीरिक मानसिक तथा भावनात्मक सेहत के बारे जानकारी प्राप्त की जा सकती है। हर समय मानव की कार्य रूचियों में आये बदलाव के साथ उसके प्रभा-मण्डल में भी लगातार बदलाव बना रहता है। परिस्थितियों के साथ मनुष्य का स्वभाव भी बदलता है, इसके साथ ही प्रभा-मण्डल का बदलना अनिवार्य है। सर्वप्रथम यह जानना आवश्यक है कि प्रभा-मण्डल क्या है? इसकी बनावट किस प्रकार की है, क्या इसका कोई सुक्ष्म स्वरूप एवं रंग भी होता है? हमारे भौतिक शरीर के चारो ओर ऊर्जा का एक अंडाकार गुब्बारा सदैव बना रहता है। यह एक ऐसा गुब्बारा होता है जिस के अन्दर हर जीवित वस्तु विचरती है। मानवी आभा मण्डल, कई तरह की रंगीन परतों का सुमेल होता है। अद्भुत ऊर्जा का यह गुब्बारा किसी भी व्यक्ति के चारो ओर देखा जा सकता है, यह तथ्य हमें किरलियन (Kirlian) कैमरे से प्रगट हुआ हैं। आधुनिक समय में औरा स्कैन जैसी सटीक एवं बढ़िया तकनीकें विकसित हो चुकी हैं, जिनका प्रयोग संसार भर में सफलतापूर्वक किया जा रहा है। औरा स्कैन करने से हमें मानवीय औरे की बहु-अयामी तस्वीर भी प्राप्त हो सकती है। जिसमें प्रतिबिम्बत रंगीन पर्तों से मानवीय स्वभाव का सम्पूर्ण तथा सही अध्ययन किया जा सकता है। आईनस्टायन तथा बाद के भौतिक वैज्ञानिकों का मानना है कि अणु अथवा कणु, और उससे भी आगे कणुका (भाव अणु के और भाग) केवल ऊर्जा ही है भाव जो कुछ भी है सब ऊर्जा ही है। जिसका हर समय विकिर्ण होता रहता है यही विकिर्ण हमारे औरे को तरंगों के रूप में हमारे सामने प्रगट करता है। यह एक चुम्बकीय क्षेत्र होता है जो मानचित्र स्कैनिंग Scanning से किया जा सकता है। इस स्कैन को पढ़ कर हम किसी भी मनुष्य मात्र के शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक स्तर का पता कर सकते हैं। यहां तक कि मानव की आध्यात्मक स्थिति का फैलाव कितना है, हम यह भी जान सकते हैं। एक विशेष परिस्थिति में हमारी मनो-दशा क्या है, इसका पता हमें औरे से चल जाता है। औरे में मौजूद रंगीन तरंगें, मनुष्य के सकारात्मक तथा नकारात्मक व्यक्तित्व का प्रतीक होती हैं जो हर समय सिकुड़ती तथा फैलती रहती हैं। आभा मण्डल के नक्शे से हम किसी भी व्यक्तित्व के सकारात्मक या नकारात्मक पहलु को पढ़ सकते हैं कि कोई मनुष्य कितना खुश है या दुसरा कितना बिमार है। वह किस तरह की व्याधीयोँ से ग्रस्त है। किसी दुसरे का आभा मण्डल सीधे आँख से विशेष परिस्थितियों में ही देखा व समझा जा सकता है। पर यह विशेषज्ञ कार्य है। स्कैन किये औरे की रंगीन तरंगों को पढ़ उससे प्राप्त जानकारी को प्रमाणित भी करना होता है। परतों के रंग गहरे, हल्के, धुन्धले या चमकीले हो सकते हैं। आभा मण्डल में पाये जाने वाले रंगों का अर्थ कुछ इस प्रकार हो सकता हैः- सोने की चमक वालाः दानवीर, उदार, खुशहाल, धनवान तथा साहसी। काले रंग की आभाः शोक, रोग, सन्देह, ईर्ष्या तथा आलस का प्रतीक है। हल्का लाल रंग: शारीरिक शक्ति, ऊँची उड़ान, काम-शक्ति का प्रतीक है। गहरा लाल रंगः क्रोध और काम का संकेतिक है। शुद्ध पीला तथा केसरीः आध्यात्मिक, आत्म-विश्वासी, आशावादी, क्रियाशील, आदर्शवादी होता हैं। काम क्रोध तथा लोभ वाले व्यक्ति उन पर प्रभावी नहीं होते। मटमैला: रोग, चिंता, डर, ऊर्जा की कमी, जीवन के प्रति निराशावादी दृष्टि वाले होते हैं। बैंगनी/जामनी रंग की आभाः इस रंग की झलक बहुत ही कम व्यक्तियों के औरे में पायी जाती है। यह रंग आध्यात्मिकता का प्रतीक है। सूक्ष्म स्तर पर ऐसे व्यक्ति ‘ऊँची’ वृति वाले होते हैं। चांदी रंगी आभाः गतिशीलता, कमजोर सेहत, आत्म-विश्वास की बहुलता, सहनशक्ति, अवसर को समझना तथा साथ ही खतरे के साथ खेलना, तीव्रता आदि। गुलाबी रंगः अच्छी सेहत, मानसिक संतुलन, निश्चल प्रेम, तथा कलात्मक रूचियाँ आदि हल्का नीला रंगः आत्म संयम, अध्यात्मक प्रविृत्ती तथा ईश्वरीय प्रेम। नीला रंगः तर्कशील, वैज्ञानिक विचार स्पष्ट मनो-वृत्ति। हरा रंगः अच्छी सेहत, हँसमुख, शांत स्वभाव व संतुलित विचार। चमकीला नारंगी रंग: कोमल मानसिक तथा शारीरिक अवस्था। आभा मण्डल क्योंकि कई रंगों का मिश्रण (सुमेल) होता है। इसलिए प्रमुख तथा स्पष्ट रंगों को ही आधार मानना चाहिए। आभा मण्डल को पढ़ना एक बड़ी कला है। यह हर व्यक्ति का दर्पण है, जिससे हमें मनुष्य की विचारक बुद्धी, मानसिकता, भावनायें, शारीरिक स्वास्थ्य, व्यवहार, आध्यात्मकता की जानकारी प्राप्त होती है। जैसे कि पहले बताया जा चुका है आभा-मण्डल के रंगों की चमक से मनुष्य की नकारात्मक एवं सकारात्मक प्रवृत्ति का ज्ञान प्राप्त होता है। नकारात्मक आभा मण्डल वाले लोग रोगी व्यक्तित्व वाले होते हैं। जरूरी नहीं कि वह शारीरिक तौर पर ही बिमार हों वह मानसिक या अध्यात्मिक स्तर पर भी गंभीर रोगी हो सकते हैं। आलस, नशा, जरूरत से ज्यादा खाना, दुसरे की थाली में पड़ा लड्डु बड़ा लगना, तनाव, संघर्ष, हिंसा, अधूरा अध्यात्मिक संबंध एक कमजोर तथा काले आभा मण्डल के परिचायक हैं। यही कारण है कि नकारात्मक आभा-मण्डल वाले प्राणी जीवन में कभी खुश नहीं रह सकते। आभा मण्डल क्योंकि एक ऊर्जा क्षेत्र होता है इसका प्रभाव दुसरों पर भी पड़ता है इसलिए सकारात्मक आभा मण्डल वाला व्यक्ति नकारात्मक आभा मण्डल वाले व्यक्ति के निकट कभी अच्छा महसूस नहीं कर सकता। नकारात्मक आभा मण्डल वह कोष है जिसमें मानव के सभी नकारात्मक विचार संचित होते रहते हैं। यही कारण है ऐसे व्यक्ति को सकारात्मकता की ओर प्रेरित किया जाना टेडी खीर होता है। हमें यह पता होना चाहिए कि किसी भी प्रकार के गलत विचार की सृजना पहले पहल मनुष्य के आभा मण्डल में ही होती है। हम यह देख चुके हैं कि आभा मण्डल हमारे समूचे व्यक्तित्व का दर्पण है। जिस प्रकार हम अपने तन को साफ सुथरा रखना जरूरी समझते हैं हमारे आभा मण्डल की सफाई उतनी जरूरी ही नहीं ब्लकि लाभकारी भी है। एक स्वस्थ औरे को और भी अधिक गुणात्मक बनाये रखने और मैले औरे को स्वस्थ बनाने के लिए दोनों प्रकार के आभा मण्डलों की सफाई जरूरी है। शुद्ध आभा मण्डल को प्रचलित प्रक्रियाओं में से किसी के साथ भी साफ करके रंगीन एवं चमकीला बनाये रखा जा सकता है। पर शर्त यह है कि मानसिक एवं भावनात्मक स्तर पर भी हमारी सोच सकारात्मक हो। मैले औरे को निर्मल करने के लिए कई प्रकार की विधियाँ प्रचलित हैं। कई विधियाँ ऐसी भी है जिनको प्रयोग में लाकर हम अपने चौगिरदे के वायु मण्डल के साथ औरे को भी शुद्ध कर सकते हैं। सब से पहली बात तो हमारे विचारक आत्मिक स्तर की हैं। हमारे विचार शुद्ध हो इसलिए हमें हर समय मानसिक तथा भावनात्मक पक्ष से क्रियाशील होना पड़ेगा। यदि हमारे विचार सुचारू (च्वेपजपअम) हैं तो हमारा व्यवहार सबके मन को भायेगा। गुरबानी में अच्छे आचार-व्यवहार को भगवान से भी ऊपर माना गया है। ‘‘सच्चो उरे सबको, ऊपरि सच्च आचार।’’ यह पंक्ति अपने भाव आप ही ब्यान करती है। सच्च क्या है? सच्च भगवान है। पर उससे भी ऊपर सत्य तथा शुद्ध आचार-व्यवहार है। इस तरह के व्यवहार से हमारे मैले आभा मण्डल को शुद्ध होने में बहुत समय नहीं लगता। अब हम उन प्रसंगों का वर्णन करने लगे हैं जिनको प्रयोग में लाकर हम पहले अपना वातावरण साफ तथा शुद्ध रख सकते हैं उपरंत अपने आभा-मण्डल की सफाई भी कर सकते हैं। प्रमुखतः नीचे लिखे ढंग इस प्रकार हैंः
  1. ध्वनि से
  2. सुगंधि से
  3. संगीत से
  4. स्फटिक/क्रिस्टल
  5. नमक से जब हम मन्दिर जाते हैं तो अराधना के लिए ऊपर टंगे घंटे को जोर से बजाते हैं। इस घंटे के बजने से जो गूँज उपजती है उस गूँज के नीचे खड़े होकर उन गूँजती तरंगों को अपने अन्दर स्माहित करने से औरे की सफाई होती है। यह प्रक्रिया एक ही समय कम से कम तीन बार जरूर की जानी चाहिए। हमे पता है कि रेकी की दीक्षा प्राप्त करने से पहले घंटी से तथा धूप से हमारा आभा मण्डल साफ किया जाता है बाद में दीक्षा की प्रक्रिया गरैंड मास्टर शुरू करते हैं। हल्के संगीत को लगातार कमरे में बजाया जाता है। धीमें संगीत से चाहे वह कोई भजन हो या गुरबाणी का शब्द हो, वादन या गायन वातावरण मन को मोहने वाला होता है। जिससे आत्मिक शांति की अनुभूति हम सबको होती है। ऐसे वातावरण में किसी भी व्यक्ति का आभा मण्डल शुद्ध हो जाता है। जाप की धुन वायुमण्डल को शांत एवं शुद्ध करती है। व्यक्ति को खड़ा करके जलती हुई तीन अगरबत्तीयें से व्यक्ति के चारांे ओर सिर से पैरों तक घड़ी की दिशा में घुमा कर आभा मण्डल साफ किया जाता है। औरे के अन्दर की मैल को साफ करके बाहर धरती में समा देने के लिए फेंक दिया जाता है। यह Sweeping Procedure है। एक ओर ढंग यह भी है कि आवश्यक स्थान को हाथ की उंगलियों को कंघी की भांति प्रयोग कर उस अंग के औरे को साफ करना तथा औरे से मिली गन्दगी को धरती में समा देने के लिए फेंक देना। सूखे कपड़े/रूमाल के साथ व्यक्ति के शरीर का आभा मण्डल साफ करना। व्यक्ति को लिटा कर सिर से पैरों तक कपड़े को खोल कर खिंचा जाता है, कपड़े या रूमाल में समेटे गये मलबे को फिर धरती में समा देने के लिए रूमाल को झटक दिया जाता है या नमकीन पानी में रूमाल को डुबो कर साफ किया जाता है। शरीर के आगे तथा पिछले भाग पर यह ढंग प्रयोग लाया जाता है। एक और बहुत ही बढ़िया ढंग है जो सम्पूर्ण वातावरण तथा आभामण्डल साफ रखने के लिए प्रचलत है वह है नमक का प्रयोग, विशेष तौर पर समुंद्री नमकः-
  6. समुंद्री नमक के क्रिस्टल एक कटौरी में रख दें, कमरे की सारी अशुद्धीयाँ इस नमक में घुल जाती है।
  7. समुंद्री डलीदार नमक को पानी में घोल कर उसका पौछा सारे घर में लगाने से घर में शुद्ध वातावरण पैदा होता है।
  8. इस नमक के घोल से रूमाल गीला करके व्यक्ति के सिर से पैरों तक शरीर के आगे तथा पीछे से खींचने से औरा साफ किया जाता हैै यह औरा साफ करने का सबसे उत्तम ढंग है।
  9. नमकीन पानी में स्नान करने से भी आभा मण्डल साफ हो जाता है। स्नान करते समय थोडे़ पानी में समुंद्री नमक घोल कर अपने सारे शरीर/सिर पर डाल दिया जाता है। शरीर को हाथों से साफ नहीं किया जाता। इसके बाद उसी समय पूरा स्नान जिस तरह से करते हो कर लेना चाहिए।
  10. जिस समय हम अपने सूखे हाथों के साथ औरा साफ करते हैं तो हाथों में संचित गन्दगी को नमक वाले पानी में झाड़ दिया जाता है। इस नमकीन पानी को नाली में ही फेंका जाता है।
  11. औरे से प्राप्त गंदगी को हरे रंग की लौ (Flame) का ध्यान कर उसके ऊपर छोड़ दें। इसके अतिरिक्त कुछ दूसरी प्रक्रियाओं से भी आभा मण्डल स्वच्छ किया जा सकता है। जैसे पेड़ की डाली, मोर पंखों से आदि।

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