अल्फा स्तर

मनोविज्ञानिकों के अनुसार हम अपना 10ः दिमाग ही प्रयोग में लाते हैं। शेष 90ः शक्तियाँ शिथिल अवस्था में ही रहती हैं। इस शिथिल हिस्से के कुछ अंशों को काम में लाया जा सकता है। यदि हम अपनी दिमागी तरंगों की रफ्तार को धीमा कर लें। ये तरंगें ई.ई.जी. (म्बव.मदमबमचींसव हतंउ) के साथ मापी जा सकती है। हमारे जागृत अवस्था में इन तरंगों की गति14 से 22 चक्र प्रति सैकंड होती है। इस स्थिति में व्यक्ति तर्क संगत होता है। जैसे अच्छे बुरे बारे का भाव। यह हमारे बायें दिमाग से संबंधित बताया जाता है। तरंगों की इस रफ्तार को ‘बीटा रिदम’ (ठमजं तीलजीउ) कहा जाता है। नींद में तरंगों की यह रफ्तार 4 चक्र प्रति सैकण्ड होती है। इस अवस्था में मनुष्य की तर्क संगत सोच बहुत ही कम होती है। नींद और जागृत के बीच की अवस्था में जिस समय इन तरंगों का चक्र 10 प्रति सैकण्ड होता है, उस अवस्था में संभव है कि हमारा बांयां और दांयां दिमाग एक-सम हो जाये। ऐसे समय में तरगों की रफ्तार 8 से 13 चक्र प्रति सैकण्ड होती है। इस अवस्था को अल्फा रिदम ।सिं त्लजीनउ कहा जाता है। यह वह अवस्था हो सकती है जिस समय मनुष्य की पूर्वाभास की शक्ति तथा उच्च क्रियाशीलता (प्दजनपजपअम – ब्तमंजपअम थ्ंबनसजपमे) तेज हो जाती है। अल्फा रिदम आधी नींद या अर्द्ध चेतना में सोते समय पैदा हो सकती है। कई बार जब मनुष्य इस अवस्था में होता है तो उसको कठिन से कठिन समस्या का हल भी मिल जाता है। पर यह अवस्था बे-लगाम होती है। दिन के समय कई बार अर्द्ध-चेतना (क्ंल क्तमंउपदह) में भी अल्फा रिदम क्रियाशील हो सकता है। हमारी कल्पना शक्ति तथा समझ के तालमेल से अल्फा रिदम की अवस्था बन सकती है। इस समय हमारे बांयें तथा दांयें दिमाग, बुद्धी तथा कल्पना शीलता का संगम होता है। तर्क क्रियाशील नहीं होता और हमारी आंतरिक चेतना तथा बाहरी संवेदना का मिलाप हो सकता है। शौच के समय भी यह अवस्था हो सकती है। हमारे दिमाग की मूलभूत तरंगों की दशा
  1. डैलटा तरंगें 1-4 प्रति सैकण्ड नींद की गहरी अवस्था, समाधिलीन
  2. थीटा तरंगें 4-8 प्रति सैकण्ड संमोहन, मग्न, तल्लीन होना
  3. अल्फा तरंगें 8-13 प्रति सैकण्ड जागे और सोये के मध्य, कल्पनाशील तथा वह अवस्था जब आंतरिक चेतना का उन्नत चेतना से संगम होता है।
  4. बीटा तरंगें 14-22 प्रति सैकण्ड जागृत अवस्था, दुनियादारी की कार्यशीलता अल्फा स्तर के लाभ अल्फा स्तर के तीन मुख्य लाभ हैंः
  5. शिथिल अवस्था (आराम)
  6. कल्पना शील अवस्था
  7. क्रिया-बद्ध (त्मचतवहतंउउपदह) अवस्था
  8. शिथिल/आरामः यह वह अवस्था है जब हमारी मांसपेशिया पूरी तरह शिथिल होकर आराम की अवस्था में होती हैं। चिंता का समावेश शुन्य होता है। शरीर तनाव-रहित होता है। हमारी सोच-शक्ति, वार्तालाप सुचारू तथा दिमाग आन्निदत होता है। यदि स्थिति तनावपूर्ण हो तो सब कुछ इसके उल्ट होगा। कार्यशीलता विकसित हो जाती है। ‘‘चिंता चिता समान’’ यह तथ्य जग प्रचलित है कि जो ध्यान लगाते हैं उनका जीवन सुख, सजीव तथा ऊर्जावान और अधिक फलदायी होता है।
  9. कल्पनाशक्ति (प्उंहपदंजपवद)ः उच्च कल्पना शक्ति से गहन समस्याओं का हल ढूंढा गया है अथवा ढूंढा जा सकता है। अनेक उदाहरणों से यह तथ्य साबित होता है। बर्नाड करिक (ठंतदंतक ब्तपबा) ने क्छ। की संगरचना के बारे में स्वपन से प्रेरणा ली, संगीतकार ब्रूकनर ने अपना सांतवा स्वर, आईनस्टाइन ने ब्वदबमचज वि त्मसंसपअपजल तथा डैसकारटे (क्मेबंतजम)ने ट्रिगोमैंटरी जैसे अविष्कार स्वपनों से प्रेरित होकर किये। अंग्रजी के शब्द प्देचपतंजपवद के दो अर्थ हैं, सांस को अन्दर की ओर खिंचना तथा दुसरा किसी से प्रेरणा लेना। सांस की लयबद्धता और प्रेरणा का सुमेल, कल्पनाशक्ति कर सकती है। अल्फा रिदम कल्पना बिना संभंव ही नहीं।
  10. क्रिया-बद्ध (त्मचतवहतंउउपदह)ः जब हम क्रिया-बद्धता की सीमा को तोड़ते हैं तो नये आयाम हमारे सामने आते हैं। अल्फा हमारी सोच-उड़ान को दायरे की प्रिधी से बाहर निकालने में सहायक होती है। अल्फा का अर्थ यह नहीं, हम मूर्ख विचारों के पीछे भागते रहें, ब्लकि हमारी सचारू सोच हमारे साथ रहनी चाहिये। नये तथा उच्च विचार हमारी सोच को ओर प्रबल करते हैं। अल्फा तकनीकेंः आँखें बन्द करते ही हम अल्फा अवस्था में प्रवेश कर जाते हैं। पहली विधि : अपने शरीर को अकड़ा कर तनाव में लाओ और केन्द्रित करो। फिर एक एक अंग को ढीला छोड़ दो तथा सारे शरीर को शिथिल अवस्था में लाओ। पहने हुए कपड़े ढीले हों, बैल्ट, घड़ी, चश्मा आदि अलग रखो। दोनो आँखों की पुतलीयां तीसरे नेत्र पर केंद्रत हो तथा इस अवस्था में (आँखें खोल कर) एकागर हो जायें। मन में दाहराओ ‘‘मैं गहरी शांति में प्रवेश कर रहा हूँ, कल्पना करो कि आप गहरे आकाश में डूबते जा रहे हों, डूबते जा रहे हों। आपकी आँखों की पलके भारी होकर अपने आप (स्वयं कोशिश नहीं करनी)गिर जायेंगी। पलकों के बंद होते ही आप अल्फा अवस्था में होगें। दुसरी विधि : शरीर के शिथिल करो उपरन्त अपनी आँखें बंद कर लो। बंद आँखों के अन्दर पुतली को तीसरे नेत्र पर केन्द्रित करो तथा 20 से 1 तक उल्टी गिणती बहुत ही आराम से धीरे धीरे करते हुए महसूस करो कि आप एक गहरी गुफा में दूर जा रहे हो। ऊपर से नीचे की तरफ सीढ़ियों से उतर रहे हो। वहां शांति ही शांति है, सुख ही सुख है, गिणती 1 पर आते ही आप ध्यान की अवस्था में होंगें। यह अल्फा स्तर है। लाभ : अल्फा अवस्था में हम चेतन होते हुए भी अचेतन मन के बिल्कुल निकट होते हैं। इस समय, हम जो भी कल्पना या विचार या उद्देश्य के बारे में सोचेंगें, अचेतन मन में अंकित होकर अन्जाने ही रूपांतर हो जायेगा तथा हमारे उद्देश्य की प्राप्ति की तरफ ले जायेगा। हमारा अचेतन मन हमारी असीम शक्तियोँ तथा कलाओं का खजाना है। अल्फा स्तर से हम इनकी पूर्ति कर सकते हैं। हमारे उद्देश्य यह हो सकते हैंः
  11. स्वास्थ्य की प्राप्ति
  12. रोग मुक्त होना
  13. व्यवसाय में उन्नित
  14. अपने स्वभाव को बदलना
  15. शांति प्राप्त करना
  16. मानसिक शक्तियों को जागृत करना
  17. नौकरी प्राप्त करना
  18. संबंधों को सुधारना
  19. दूसरों के प्रति जागरूक होना, आदि। इस प्रक्रिया में अभ्यास की जरूरत पड़ती है। आरम्भ में यह काम सहज नहीं लगता पर हर रोज के अभ्यास तथा अचेतनता प्रभावित होने से अल्फा स्तर प्राप्त हो जायेगा।

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